You changed but why?

I always thought

A friend in need is a friend indeed

I always thought

The friend I got was a true friend

I always thought

You’ll understand my feelings

But,hey friend you changed!!

I always said

We’re like thread and kite

And sun and its light

But I was wrong

You changed!!

I always loved you

I always helped you

I was always with you

Then why you changed?

Don’t you remember the lovely moments

we spent with each other

We were like a pair of shoes

We always went together to school

We always came together from school

But then why you changed?

Hey friend you changed!!

But why you changed?

💖मेरे प्यारे पापा💕

सुंदर आशियाना बसाया

चाँद तारों को मेरे लिए

धरती पर ला बसाया

उँगली थामी हमेशा मेरी

परछाँईं बन मुसीबतों से बचाया

पथरीली राह पर चल

फूलों की सेझ बिछाई

मेरे लिए सुख की नदियाँ बहाईं

अपना सारा प्यार लुटाया

मुझे अच्छा इंसान बनाया

पापा आपने मेरा जीवन

स्वर्ग से भी सुखी बनाया!!

Its for you Dad.For every daughter her father is her hero.And you are my hero.Love you my hero!💖

💖मेरे प्यारे पापा💕

सुंदर आशियाना बसाया

चाँद तारों को मेरे लिए

धरती पर ला बसाया

उँगली थामी हमेशा मेरी

परछाँईं बन मुसीबतों से बचाया

पथरीली राह पर चल

फूलों की सेझ बिछाई

मेरे लिए सुख की नदियाँ बहाईं

अपना सारा प्यार लुटाया

मुझे अच्छा इंसान बनाया

पापा आपने मेरा जीवन

स्वर्ग से भी सुखी बनाया!!

Its for you Dad.For every daughter her father is her hero.And you are my hero.Love you my hero!💖

नारी👩

चमकती है वह धूप सी🌞

ममता है उसकी गहरे समंदर सी🌊

दिल है उसका फूल सा🌹

मन है उसका मोम सा👩

सोचती है वह पहाड़ जितना बड़ा 🗻

प्यार है उसका जैसे गहरा कुँआ☺

वह कोई और नहीं नारी है हमारे भारत की।👭

-काव्या माहेश्वरी

माँ

💖पूरी दुनिया से लड़ती है

सारे दर्द सहती है💙

💜अपने लहू से सींच कर

हमें बड़ा करती है💛

❤वह माँ ही तो है

जो हमारे लिए जीती है💗

💕और हमारे लिए ही मरती है।

-काव्या माहेश्वरी

परीक्षाओं के योद्धा

चल पड़ा रण भूमि में सीना तान

हाथों में लिए स्याही की तलवार

साथ में था बड़ों का आशीर्वाद

और मेरी कलम पर मेरा विश्वास

आज मुझे जीतकर ही आना है

सवालों की फौज को मिटाकर ही आना है

क्या हूँ मैं इसका मोल बताना है

अपनी मिट्टी का गौरव बढ़ाना है

आज चाहे जो हो दुश्मन को मात देनी है

अपने उत्तरों से उनकी बोलती बंद कर देनी है

इतिहास के पन्नों में अपनी छाप छोड़नी है

वर्तमान में परिश्रम कर कल की नीव रखनी है

इस युद्ध में मैं सफल हो जाऊँ

यही मेरी लिखते दम तक उम्मीद रहती है

मैं इस परीक्षा में उत्तीर्ण रहूँ

यही मेरी कोशिश रहती है।

-काव्या माहेश्वरी